निंबार्क आश्रम में आयोजित दिव्य गतिविधियों और पहलों को देखें। पवित्र अनुष्ठानों और आध्यात्मिक प्रवचनों से लेकर सांस्कृतिक आश्रम गतिविधियाँों तक, हर आयोजन भक्ति, सद्भाव और सेवा भावना को प्रोत्साहित करता है।
मंगल आरती एक पवित्र सुबह की आरती है जो भगवान को प्रेम और श्रद्धा से जाग्रत करने हेतु की जाती है। इसमें घंटी, शंख और भजनों की मधुर ध्वनि होती है, जो दिन की दिव्यता का प्रारंभ करती है।
भोग आरती में भगवान को श्रद्धा से भोजन अर्पित किया जाता है, इसके बाद दीप, अगरबत्ती और मंत्रों के साथ आरती की जाती है।
उत्पान आरती एक विशेष पूजा है जो श्री राधारानी के दिव्य जन्म (उत्पत्ति) के उत्सव के रूप में की जाती है।
संध्या आरती एक शांत संध्या पूजा है जिसमें भक्त दीप या दिया भगवान को अर्पित करते हैं, साथ में भजन और मंत्र गाते हैं।





श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा संगठन (ट्रस्ट) द्वारा सेवा और करुणा की भावना के तहत भीलवाड़ा में 500 बेड के एक विशाल अस्पताल का निर्माण प्रारंभ किया गया है। इस अस्पताल का उद्देश्य समाज के निर्धन एवं वंचित वर्गों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, अनुभवी चिकित्सकों और समग्र स्वास्थ्य की सोच के साथ यह अस्पताल आशा की एक नई किरण बनकर उभरेगा। यह परियोजना न केवल ट्रस्ट की आध्यात्मिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक उत्थान की दिशा में भी एक सशक्त कदम है। इसके पूर्ण होने पर यह अस्पताल सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान सिद्ध होगा।

“श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव” के शुभ अवसर पर निंबार्क आश्रम, भीलवाड़ा में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। महंत मोहन शरण शास्त्री जी के नेतृत्व में आश्रम परिसर में विविध आध्यात्मिक गतिविधियाँ सम्पन्न हुईं। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति ने भाग लिया, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर में लौटी। नगरवासियों ने इस यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया। महोत्सव की शुरुआत श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ और सुंदरकांड से हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने आत्मिक आनंद की अनुभूति की। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जहाँ बालकों और महिलाओं ने श्रीराम की जीवन लीलाओं को नृत्य और नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। विशेष हवन, भगवान का अभिषेक, और सामूहिक महाआरती ने इस आयोजन को दिव्यता से भर दिया। अयोध्या से हो रहे प्राण प्रतिष्ठा समारोह का लाइव प्रसारण विशाल स्क्रीन पर दिखाया गया, जिससे भक्तजन सीधा जुड़ाव महसूस कर सके। समिति के पदाधिकारियों—राधेश्याम सोमानी, गोपाल शर्मा, महेश जाजू, सरिता अजमेरा और अनेक सेवाव्रती जनों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव का भी सजीव उदाहरण बन गया।

शिव पुराण, भगवान शिव की महिमा, लीला और उपदेशों से युक्त एक अत्यंत पवित्र ग्रंथ है। निंबार्क आश्रम, भीलवाड़ा में शिव पुराण कथा का दिव्य प्रारंभ भक्तों के लिए एक अलौकिक और आध्यात्मिक अनुभव बन गया। महंत मोहन शरण शास्त्री जी के पावन सान्निध्य में कथा की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चारण, मंगल कलश स्थापना, और गणपति पूजन से की गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में कथा वाचक आचार्य जी द्वारा भगवान शिव की महिमा, शिव-पार्वती विवाह, नीलकंठ अवतार, दक्ष यज्ञ, शिव तांडव आदि प्रसंगों को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया गया। हर दिन कथा स्थल पर प्रभात फेरी, रुद्राष्टक स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र, और सांझ की आरती के माध्यम से वातावरण शिवमय बन जाता है। श्रद्धालु कथा श्रवण करते हुए अपने जीवन में शांति, मोक्ष और धर्म का मार्ग प्राप्त करते हैं। इस आयोजन में नगर के कोने-कोने से श्रद्धालु, साधु-संत, महिला मंडल और युवा बड़ी संख्या में सहभागी हो रहे हैं। कथा के अंत में महाप्रसादी वितरण और विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।

इस अभिषेक की शुरुआत शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चारण, रुद्राष्टक और महामृत्युंजय मंत्रों के साथ होती है। महंत मोहन शरण शास्त्री जी के सानिध्य में, भक्तगण और आचार्य मंडली द्वारा गंगाजल, पंचामृत, दूध, केसर युक्त जल और अनेक पवित्र तत्त्वों का प्रयोग किया जाता है। जलधाराएं विशेष रूप से निर्मित सहस्त्रधारा कलशों या पाइप सिस्टम के माध्यम से शिवलिंग पर निरंतर गिरती हैं। इस अनुष्ठान में शामिल होकर भक्तजन असीम शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन, सामूहिक प्रार्थना, और महाआरती का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर हो उठते हैं।

भीलवाड़ा स्थित निंबार्क आश्रम में हाल ही में आयोजित रुद्राभिषेक कार्यक्रम एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान रहा। इस आयोजन का नेतृत्व महंत मोहन शरण शास्त्री जी के सानिध्य में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पंडित नीलेश पाराशर के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद, पंचामृत और गंगाजल से भगवान शिव का विधिवत रुद्राभिषेक हुआ। इस अनुष्ठान का उद्देश्य लोककल्याण, विश्वशांति और सभी भक्तों के स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना करना रहा। निंबार्क सेवा समिति के अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी जी ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष धार्मिक भावनाओं को जागृत करने और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के लिए किया जाता है।
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